//….. का कहौं मोर राम कहानी …..// घातेच तैंहा काबर सुरता आवत हस, खऊलत पानी म काबर, मोर जीव ल अऊटावत हस। का मैं तोर बिगाड़ करेंव ओ गोरी मोर करेजा होगे सुकसी बरोबर, हांड़ मांस तिरियागे, बईहा होगेंव तोरेच कारन कभू मैं हांसव , कभू मैं मातंव मति मोर छरियागे। कस ओ! तोला कहीं नी लागे अईसने कोनो करथे, हांस देस , नाच देस , कइसन मोला तैं फांस देस। का किरिया मोर बर तैं पारे हस मोला तो लागथे , कोनो जादू मंतर मारे हस छटपटाथों , अटियाथों , अल्थी-कल्थी सुर तोर लमाथों। ए बही ए तैं मोला का बना डारेस कइसन ले कइसन होगेंव बिन ठउर दुवार के टेसन होगेंव तोला कोनो तरस घला नइ आए मोर बर दू छिन गोठियाके हिरदे के अंगरा ल बुझा देते फेर बैरी , तोला थोरकुन दया नइ आए ओ मया के तैं बान चलाके मोर जिनगी म गदर मताए ओ कोन घड़ी कोन बेरा म कब के लगाए हस मोर बर बानी बन-बन भटकौं , बैरी के मया म कोन ल कहौं मोर राम कहानी। योगेश निर्मलकर ‘नाना’ पटेवा,महासमुन्द, छ.ग. मोबाइलः 9770199268