//…..का कहौं मोर राम कहानी…..//


घातेच तैंहा काबर सुरता आवत हस,
खऊलत पानी म काबर, मोर जीव ल अऊटावत हस।
का मैं तोर बिगाड़ करेंव ओ गोरी
मोर करेजा होगे सुकसी बरोबर,
हांड़ मांस तिरियागे,
बईहा होगेंव तोरेच कारन
कभू मैं हांसव, कभू मैं मातंव
मति मोर छरियागे।
कस ओ! तोला कहीं नी लागे
अईसने कोनो करथे,
हांस देस, नाच देस, कइसन मोला तैं फांस देस।
का किरिया मोर बर तैं पारे हस
मोला तो लागथे, कोनो जादू मंतर मारे हस
छटपटाथों, अटियाथों, अल्थी-कल्थी सुर तोर लमाथों।
ए बही ए तैं मोला का बना डारेस
कइसन ले कइसन होगेंव
बिन ठउर दुवार के टेसन होगेंव
तोला कोनो तरस घला नइ आए मोर बर
दू छिन गोठियाके हिरदे के अंगरा ल बुझा देते
फेर बैरी, तोला थोरकुन दया नइ आए ओ
मया के तैं बान चलाके मोर जिनगी म गदर मताए ओ
कोन घड़ी कोन बेरा म
कब के लगाए हस मोर बर बानी
बन-बन भटकौं, बैरी के मया म
कोन ल कहौं मोर राम कहानी।

योगेश निर्मलकर ‘नाना’
पटेवा,महासमुन्द, छ.ग.
मोबाइलः 9770199268

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