बढ़ते चलो-बढ़ते चलो
समय को मुट्ठी में कौन कर सका,
नदी की जलधारा सा बहो ।
रुकना तेरा काम नही है
अग्रसर हो पथ पर डटे रहो।
मंजिल को पाना है तुम्हे,
पर्वत सा अड़े रहो।
लक्ष्य मिले देर ही सही,
पर, मत तुम उदास हो।
हो जाती हैै गलती कहीं पर,
दूसरोें से नही खुद से कहो।
हंसी का पात्र भी बनना पड़ेगा,
ध्यान मत दे चलते रहो।
राह में तेरी गहरी खाई है,
उसको तुम लांघते चलो।
गिरना नही उठना तुम्हे है,
रास्ते में सो जाए कहीं ऐसा न हो।
कहीं खुशी गम है कहीं पर,
जिंदगी में मुस्कुराते रहो।
सुख है, दुख तो एक बहाना है,
समय अपना है कि खुश रहो।
संघर्ष कर जिंदगी बनाले,
जुल्मोें को मत तुम सहो।
सफलता एक दिन कदम चूमेंगी,
बढ़ते चलो, बढ़ते चलो।
- योगेश निर्मलकर ‘नाना’
मो0 9770199268
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