तोला देखे रेहेंव............

तोला देखे रेहेंव चैती, घर बनत रिहिस ते करा
धमेला म गिट्टी डोहारे रहे
एक हाथ में लइका पोटारे रहे
गोसइया ले मार खाए रहे
वो ठेकेदार के वासना के आंखी म
तोला देखे रेहेंव।।

तोला देखे रेहेंव चैती, एक ठन फूटहा कुंदरा म
छेतका कुरिया म बइठे
मया दुलार बर अइठे
काहत गोसइया नइते
सिसकत सुखावत तोला देखे रेहेंव।।
तोला देखे रेहेंव चैती, तोर संगी के घर, तोर ससुराल म
उहाँ सब ले मार खाते रेहे
मइके ले पइसा मंगाते रेहे
तभो ले माटी के तेल छिते रेहे
सुक्खा लकड़ी कस जरत तोला देखे रेहेंव।।

तोला देखे रेहेंव चैती, रस्दा म रेंगत
अपन रद्दा जात रेहे
लोगन के फबती मार खात रेहे
अऊ गंगा धार आंसु बोहात रेहे
दुनिया के अतेक भीड़ म अकेल्ला तोला देखे रेहेंव।।

तोला देखे रेहेंव चैती, सबे अख़बार के पहली पन्ना म
फोटो छपाय रिहिस
तोर हाल ल बताए रिहिस
कहानी ले तोर लोगन मजा उड़ाय रिहिस
चिरहा फटहा लुगरा अंछरा म तोला देखे रेहेंव।।
तोला देखे रेहेंव चैती, फूटहा करमलेखा के मार ले
तोला देखे रेहेंव।।


योगेश निर्मलकर 'नाना'

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