धरती माँ के कोरा म..….
मोर धरती माँ के कोरा मफूल बगरा लौ रे
डगर-डगर म बाट-बाट म, मया के दीया जला लौ रे
(1) रूख-राई संग मितान बद लो, सुख-दुख के संगवारी ए
हाथ पसार के मन म समा लौ, पुरखौति के चिन्हारी ए
तुलसी, पीपर, बर अउ डूमर
देवता एमा बसा लौ रे............... मोर धरती माँ के कोरा म।।
(2) टूटथे-कटथे पीरा ल सहिथे तब ले तोर करा नवथे
परलय-झंझा संताप ल दुख-पीरा ल हरथे
घाम, पियास, बिपत बेरा म
माटी के जतन ल कर लौ रे................... मोर धरती माँ के कोरा म।।
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