तेरे इश्क में......

खुशरंग इश्क में हम भी तो मरते चले गए।
तेरे इश्क की दरिया में डूबते चले गए।।
दुनिया में खूबसूरत है दिल का नज़राना।
कम्ब़ख़्त इश्क़ में हम मिटते चले गए।।
जमाने ने मेरा नाम रखा तू भी कुछ नाम रखदे।
नाम मुझे मिल जाए ये दुआ करते चले गए।।
गिज़ालों की तरह नाच उठता है मन।
पर इज़्ाहार में ही वक्त बितते चले गए।।
अनसुलझे पहेलियों की तरह खोया रहता हूँ।
कुछ याद न रहा खुद को भी भूलते चले गए।।
सौगात में प्यार कुछ उधार मांगते पर।
सुखऱ् दीवारों से टकराकर हंसते चले गए।।
ज़रा सा याद कर ले इस नाचीज़्ा को।
मयस्सर होगी जन्नत इश्क की किताब पढ़ते चले गए।।
जमाना भी बड़ा बेरहम है कि क्या बताऊँ।
बेदम होकर भी और पीटते चले गए।।
कबुल करके मेरे प्यार को इनायत करना।
‘नाना’ तो तेरे इंतज़ार में यूँ ही लूटते चले गए।।

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