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प्राथमिक शाला सलिहाभांठा में स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मना

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  पटेवा : प्राथमिक शाला सलिहाभांठा में स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर देशभक्ति से ओतप्रोत गीत गाते हुए बच्चे शाला से रैली निकालते हुए गली भ्रमण में निकले। जैसे- जैसे रैली आगे बढ़ी गाँव के लोग रैली में शामिल होते गए। गाँव में भी ध्वजारोहण करते हुए शाला पहुंची। शाला में पहुंचकर बच्चों का सांस्कृतिक - साहित्यिक कार्यक्रम हुआ जिसमें शाला के सभी बच्चे व आंगनबाड़ी के बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।  राष्ट्रीय पर्व में शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष पिरीतराम साहू ने प्राथमिक शाला, जया साहू ने आंगनबाड़ी केंद्र में ध्वजारोहण किया। भुवन साहू, घांसुराम दीवान, दौलतराम दीवान, भुनेश्वर साहू, पंचराम ध्रुव, वामन देव साहू, जया साहू, हीरा डड़सेना, मीना दीवान, बिसनी दीवान, हेमलता ध्रुव गायत्री दीवान, हेमलता साहू, मनटोरा बाई, कांशी बाई, फाग बाई, सुकदेव दीवान, हीरालाल साहू, कृपाराम ध्रुव, दयालु ध्रुव, झड़ी दीवान, डेरहा दिवान, मयाराम दिवान, इतवारी ध्रुव, तिलक साहू, सेवक दीवान, उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 4 का तन्मय और थनेश्वर ने किया। आभार प्रदर्शन संस्था के प्रधानपाठक...

प्राथमिक शाला सलिहाभाठा में मनाया गया शाला स्थापना दिवस

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 पटेवा : प्राथमिक शाला सलिहाभाठा में शाला स्थापना दिवस मनाया गया। शाला के 62वीं वर्षगाँठ पर गाँव के लोगों की उपस्थिति में शाला में वृक्षारोपण किया गया और स्थापना से आज तक के यादों को सभी के साथ आनंददायी अनुभूति में साझा किए। शाला स्थापना दिवस पर उपस्थित लोगों द्वारा स्वयं से व्यवस्था कर विभिन्न प्रकार के पौधे लाए थे, जिसका रोपण शाला में अपनी ओर से करते हुए इस अवसर को यादगार बनाया। शाला में कटहल, मुनगा, बादाम, काजू, आंवला, सीताफल, निम्बू, संतरा,अमरुद, जामुन जैसे पौधे लगाए गए। शाला के प्रधानपाठक द्वारा उपस्थित लोगों को शाला सहयोग और बच्चों  के सीखने के बेहतर माहौल बनाने के लिए सतत प्रयास हेतु शपथ दिलाया गया।  ज्ञात हो कि समुदाय के द्वारा शाला को विभिन्न अवसरों पर सदैव सहयोग मिलता रहता है। शाला स्थापना दिवस के गौरवशाली अवसर पर 'हमारे सहयोगी' कॉलम में उपस्थित सभी लोगों का हाथों की छाप रबर पेंट से शाला की दीवार पर नाम सहित यादगार प्रतीक के रूप में लगाया गया। शाला के शिक्षकों द्वारा इस मौके पर अतिरिक्त न्योता भोज भी दिया गया। पर्यावरण संरक्षण समिती पटेवा से त्रिलोकी साहू, तरुण...
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//….. का कहौं मोर राम कहानी …..// घातेच तैंहा काबर सुरता आवत हस, खऊलत पानी म काबर, मोर जीव ल अऊटावत हस। का मैं तोर बिगाड़ करेंव ओ गोरी मोर करेजा होगे सुकसी बरोबर, हांड़ मांस तिरियागे, बईहा होगेंव तोरेच कारन कभू मैं हांसव , कभू मैं मातंव मति मोर छरियागे। कस ओ! तोला कहीं नी लागे अईसने कोनो करथे, हांस देस , नाच देस , कइसन मोला तैं फांस देस। का किरिया मोर बर तैं पारे हस मोला तो लागथे , कोनो जादू मंतर मारे हस छटपटाथों , अटियाथों , अल्थी-कल्थी सुर तोर लमाथों। ए बही ए तैं मोला का बना डारेस कइसन ले कइसन होगेंव बिन ठउर दुवार के टेसन होगेंव तोला कोनो तरस घला नइ आए मोर बर दू छिन गोठियाके हिरदे के अंगरा ल बुझा देते फेर बैरी , तोला थोरकुन दया नइ आए ओ मया के तैं बान चलाके मोर जिनगी म गदर मताए ओ कोन घड़ी कोन बेरा म कब के लगाए हस मोर बर बानी बन-बन भटकौं , बैरी के मया म कोन ल कहौं मोर राम कहानी। योगेश निर्मलकर ‘नाना’ पटेवा,महासमुन्द, छ.ग. मोबाइलः 9770199268
//.......दुनिया के ये मेले हैं........// दुनिया के ये मेले हैं, खुशियों के हिंडोले हैं। गीत मेरे..... दिल-ए-गुलज़ार से हम सबके तराने हैं.......... दुनिया के ये मेले हैं.......... 1. जिंदगी अपनी शुकुं-ए-चाहत है। जरा जी के मर ले, रूमानी आदत है।। सपनों के..... इस जहान से, निकली रंगी फंसाने हैं......... दुनिया के ये मेले हैं......... 2. आसमाँ छूले किसने रोके हैं। ढूँढने की हद से मिलते मौके हैं।। जिसको ढूँढे...... हैं बाजार से, वो तो रक्खे सिराहने हैं........ दुनिया के ये मेले हैं........ योगेश निर्मलकर 'नाना ' बरेकेल खुर्द, पटेवा , (महासमुंद) मोबा.  9770199268
बच्चों से सीखाे हँसना, बच्चे हैं जग का गहना ये ताे हैं अनमाेल.... हो... दिल काे लुभाए इनके बोल।। (1) भेदभाव काे भूलकर, मिलकर रहना सिखाती है पल में रूठना पल में मिलना, हमकाे ये बतलाती है बच्चे हैं सबका ललना.... देवाें की है ये प्रतिमा, ये ताे है अनमाेल..... हो... दिल काे लुभाए इनके बोल।। (2) काैन है अपना काैन पराया, हाेता नही खब़र सबको अपने बीच समाले, इनकाे नही उज़र बोली है गुड़ की भेली.... बचपन की हँसी ठिठाेली, ये ताे है अनमाेल..... हो..... दिल काे लुभाए इनके बोल।। (3) द्वेष लोभ आैर द्रव्य दुश्मनी, इनकाे नही पता है ये सबके हैं इनके सब हैं, इनकी यही अदा है खिलती कलि ये बच्चे हैं.... तन-मन के ये सच्चे हैं ये ताे हैं अनमाेल..... हो..... दिल काे लुभाए इनके बोल।। याेगेश निर्मलकर ‘नाना’ 
//.....दुनिया जीत लो.....// हो गर हौसले बुलंद, तो कभी मात नही होती क्योंकि बिन बादल, कभी बरसात नही होती दीपक का ऐसा अंदाज़ न था, हवा भी उसके साथ न था लगती कमियाँ ही थी उसके पास फिर भी वह निराश न था चिंगारी की बस धधकने की बारी है कि वह एक शोला बन जाए असंभव तो कुछ भी नही है कि जो उजास के लिए बला बन जाए जो जीतने की चाहत रखता है, और जीतता है उसे कायनात भी साथ देती है जज़्बा हो दिल में कुछ पाने की तो चाहत कदमों के पास होती है हँसने वाले तो है बहुत यहाँ पर थाम लिया उजाले का दामन तो रात नही होती जो हँसके जी गया जिंदगी को उसके लिए आंसु असफलता ही बात नही होती। - योगेश निर्मलकर ‘नाना’    मो0 - 9770199268
//----दारु के गोठ----// जेती देखबे तेती दारू के हे महिमा जे घर म दारू नइ हे तिहाँ नइ जाए कोनो पहुना दारू के गोठ सबो ल बड़ गुरतुर सुहाथे दू पइसा कमाके संग-संगवारी ल चार पइसा के पियाथे पियत रहा पियत रहा हमर बाप के का जात हे भले चिरहा फटहा लइका पहिरे अउ गोसइन जइसन परे घर चलात हे लड़ई झगरा अउ फूटहा कुंदरा दारू देख मुंह चुचवाए लार झूमत गिरत कहे जवान हमर घर हमर दुवार हम खाबो तीन जुवार जिनगी म का हे पीना हे तभे जीना हे एक गोडि़या संग दू गोड़ के चरबन समोना हे खाए बर दाना नइ हे पीए बर हे अंगरेजी माल घर बार के इज्जत मान नइए कोनो खियाल दाना के पूरती होगे कम कम होगे गंगा के धार घरो-घर अउ गांव-गांव म लगत हे दारू के बाजार बाप ह पियत हे दारू लइका ल मंगावत हे सुवाद चिखे लइका सीखे दारू के बोतल हलावत हे सिरतोन कहात हंव एक दिन दारू - दारू बर होही लड़ाई बाप-बेटा, कका-भतीजा एक दूसर के मांस भूंज चीथ-चीथ के खाही।।                                 योगेश निर्मलकर 'नाना'       ...